94. रुये सनम् देखते रहे

 

 

हम कारोबारे देर व हरम देखते रहे!

नजदीक से खुदा की कसम देखते रहे!!

 

जो कुछ भी हम को मिलना है मिल जायेगा कभी!

हम वो नहीं जो दस्ते करम देखते रहे!!

 

गेसु संवारना तो फक़त काम है अपना!

कितने हैं पेच कितने हैं खम् देखते रहे!!

 

सूरत हम अपनी देखते हैं उनकी आँख में!

आईना रख के सामने हम देखते रहे!!

 

आजार हम को सहने की आदत सी होगई!

बाकी है और कितने सितम देखते रहे!!

 

जामे वीसाल हमको गनीमत है साकिया!

औरों की तरह सागरे जम् देखते रहे!!

 

अपनी नज़र को खूब है नज़ारये जमाल!

जब देखते हैं जल्वा तो हम देखते रहे!!

 

सजदों से हम को काम है और बन्दगी अजीज!

हम बुतकदे में रुये सनम् देखते रहे!!

 

दावर हम अपनी फिक्रे रसा के तुफेल में!

करतास और नाके कलम देखते रहे!!

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