मैखाना जा रहा हूँ किसी पारसा के साथ!
अच्छा है एक मजाक भी ये रहनुमा के साथ!!
किस्ती कहाँ डुबोदे कहाँ छोडदे ये साथ!
गुजरी है एक उम्र मेरी नाखुदा के साथ!!
बाबे कबूल से कभी शिकवा न कीजिये!
तासीर भी जरूरी है आहे रसा के साथ!!
क्या जाने किस मुकाम पे सजदों का शौक हो!
मेरी जबीन रहेगी तेरे नक्शे पा के साथ!!
मैं चाहूँ अपने आप में मैं तुझ को देख लू!
तेरा ही अक्स होगा मेरे आईने के साथ!!
दावर बुतों को कल्मा पढा तो दिये मगर!
अच्छा नहीं हुआ ये बुतों के ख़ुदा के साथ!!