कलमे का राज बताओ बताओ नारे!
कलमा नबी का पढ़ाओ पढाओ नारे!!
क्या ला का मतलब है हम को सुनाओ!
और इल्लल्लाह हम को बताओ!
ना यूँ तुम ठगाओ ठगाओ ना रे!!
क्यूँ रूह को सांस अब तुम्हें कहते!
उलझकर हदीसों में तुम क्यूँ रहते!
ये समझाके हम को दिखाओ दिखाओ नारे!!
ये फल फूल डाली ये मुजैगल्यका!
ये कलमा तेरा कैसा होगारे अल्लाह!
समझकर कोई भी सुनाओ सुनाओ नारे!!
ये तागा ये कपड़ा ये रोटी बनोले!
बदन पर है किस के ये कलमे के चोले!
मन् अरफ पहले बतओ बताओ नारे!!
मन् अरफ अल्लाह जो कोई देखे!
फिर वो अल्लाह अल्लाह क्यूँ कर हैं कहते!
ना झूटी ये बातें बानाओ बनाओ नारे!!
ये कलमा हकीकत में है एक खजाना!
ये अनहद के अन्दर है तुम अपने पाना!
ये कलमे में तन को समाओ समाओ नारे!!
समझ करके कलमा जो कोई पढ़ेगा!
वो मरकद में जिन्दा हमेशा रहेगा!
इसे जिस ने जाना दिखाओ दिखाओ नारे!!
है कलमे में अहमद जो अल्ला से पहले!
अहद आगया इस्मे अहमद से पहले!
यही मीम को तुम हटाओ हटाओ नारे!!
`मुनव्वर` जो खोले हैं कलमे की कुंजी!
`रफीक` आका बोले है कलमे की बोली!
अय दावर सभी को सुनाओ सुनाओ नारे!!