87. कुरआन पढके देख ले

 

 

एक निगाहे नाज से तू अये सितमगर देख ले!

कतल् करना है तो पहले अपना खँजर देख ले!!

 

मकसद वो अरमाँ यूँ सैकड़ों इस दिल में हैं!

आजजी और इनकसारी का भी दफतर देख ले!!

 

परदा पोशि ऐब पोशि सीख ले अये जाहिद!

किस कदर शिकवे हैं जालिम् अपने सर पर देख ले!!

 

अश्रफुल मखलूक हूँ मैं काइनात वो दहर में!

तुझको गर बावर नहीं कुरआन पढके देख ले!!

 

अपने दस्ते नाज से तू काट दे गर्दन मेरी!

हाँ मगर ये शर्त है तू जोरे खंजर देख ले!!

 

साहिल एकजोई पर अन्दाजाये हस्ती न कर!

अहद् व अहम्मद का मगर पहले समन्दर देख ले!!

 

गैर तू मुझको समझता है ये तेरी भूल है!

कौन हूँ मैं कौन है तू ये बराबर देख ले!!

 

आयेगा तुझको नज़र तेरा वजूद ऐ नासेह!

दिल ही खुद एक आईना है अपना पैकर देख ले!!

 

मोहम्मद जारहे हैं रब से मिलने अर्श आज़म पर!

खूब होगा अब तमाशा चल के दावर देख ले!!

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