87. कदमों में आ खड़ा

 

 

कदमों में तुम जगह दो बंदा नवाज़ ख्वाजा

बंदे का ग़म भुला दो बंदा नवाज़ ख्वाजा

 

हम मुस्तफ़ा के ख़ादिम आशिक़ तुम्हारे आका

हम को भी कुछ सिला दो बंदा नवाज़ ख्वाजा

 

गेसू बिछा के अपने मुर्शिद को तुम उठाए

हम को ज़रा सिखा दो बंदा नवाज़ ख्वाजा

 

गेसू दराज़ आका हम बे कसों के सर पर

गेसू ज़रा उड़ा दो बंदा नवाज़ ख्वाजा

 

काबे की जालियां हैं गेसू दराज़ अपने

सजदे करूं बिछा दो बंदा नवाज़ ख्वाजा

 

हर औलिया तुम्हारी परवाज़ जानते हैं

वाक़िफ़ मुझे करा दो बंदा नवाज़ ख्वाजा

 

दावर तुम्हारा ख़ादिम कदमों में आ खड़ा है

तुम इसको आसरा दो बंदा नवाज़ ख्वाजा

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