81. जलवा दिखा दो

 

 

मुझे भी आपका जलवा दिखा दो ग़ौस-ए-यज़दानी

मेरे महबूब-ए-सुब्हानी मेरे महबूब-ए-सुब्हानी

 

तुम्हारी दीद दिखला कर करो हसरत मेरी पूरी

दिखा दो आपका चेहरा मेरे माशूक-ए-रह्मानी

 

मेरी इज़्ज़त बढ़ेगी आपका दीदार अगर होगा

मेरी इज़्ज़त बढ़ा दो शरफ़ बख़्शो ग़ौस-ए-जीलानी

 

करूँगा दोनों आलम में मैं बस इस बात का चर्चा

मुझे दीदार बख़्शे हैं सभी वलियों के सुल्तानी

 

मुझे दीदार से एक बार कर दो सरफ़राज़ आका

करेंगे दीन-ओ-दुनिया मेरी इज़्ज़त ग़ौस-ए-समदानी

 

तुम्हारा चाँद सा चेहरा अगर एक बार देखूँगा

तसव्वुर ता क़यामत तक रहेगा मुझको नूरानी

 

जहाँ वालों को दे देना ख़ज़ाने माल दौलत सब

अता कर दो ये दावर को भी शरफ़ अल्लाह के जानी

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