कलमे का है भेद निराला!
कौन यहाँ है कलमें वाला!!
ला जो नफि है कलमे के अन्दर!
राज बताओ मेरे बिरादर!!
और इला का खोल दो दफ्तर!
कौन है बैठा दोनो में छुपकर!!
ला व इला में कौन है आला!
कौन यहाँ है कलमे वाला!!
ला जो नफि है धब्बा न समझे!
कलमे का दम है गौर से देखो!!
इस की हकीकत् को है जानों!
ला व इला का राज बतादो!!
ला व इला है चाँद का हाला!
कौन यहाँ है कलमे वाला!!
कलमे से खुद को तैयब् बनाना!
खोल के कुरआँ दिल को दिखाना!!
ला व इलाह को सामने लाना!
रमज है इसमें क्या क्या बताना!!
कलमे में खुद है कलमे वाला!
कौन यहाँ है कलमे वाला!!
सौम सलात हज्ज और जकात भी!
कल्मे में हैं गौर करो जी!!
देखो अगर तुम हो बीनाई!
खल्क से बैय्यत् लो ना कभी भी!!
भेद अजीब है और निराला!
कौन यहाँ है कलमे वाला!!
कलमे की कुँजी अलीफ लाम मीम है!
खोल के देखो कुरान पहले!!
मुर्शद रफीक अली हम को बताये!
मतलब इस का भी समझाये!!
दावर मिला है रूतबा ये आला!
कौन यहाँ है कलमे वाला!!
(निगाहे यार में जलवे भी देखो चार हैं!
कामिल मिले हैं जिन को कलमे से पार हैं!)