फ़रियाद रस हमारे सरकार गौस-ए-आज़म
महबूब हैं ख़ुदा के दिलदार गौस-ए-आज़म
अर्श बरीं पे कांधा सरकार को दिए हैं
सरताज औलिया हैं सरकार गौस-ए-आज़म
मोहताज उनसे मिल कर सरताज बन गया है
इमदाद का वो दर है दरबारे गौस-ए-आज़म
ज़िंदा किए हैं मुर्दे ठोकर से मार कर के
दिखलाए हैं करिश्मे कई बार गौस-ए-आज़म
गौस-उल-वरा की उल्फ़त चोरों से पूछ लेना
अबदाल कर के छोड़े सरशार गौस-ए-आज़म
कश्ती को डूब कर के मुद्दत गुज़र गई थी
फिर से निकाले ज़िंदा किए पार गौस-ए-आज़म
दावर तुम्हारी क़िस्मत फिर सो नहीं सकेगी
दावर को कर दिए हैं बेदार गौस-ए-आज़म