कर्बला में सर कटाया मुरतज़ा के लाल ने
कुफ्र और ज़ुल्मत को मिटाया मुरतज़ा के लाल ने
कातिलों के तेग़ वो खंजर खुद ब खुद शर्मा गए
हक का वो जोहर दिखाया मुरतज़ा के लाल ने
यार बेहतर दीन के और लाखों थे कुफ़ार के
दीन-ए-हक फिर भी बचाया मुरतज़ा के लाल ने
ता क़यामत नाम रोशन कर दिए इस्लाम का
दीन का परचम चढ़ाया मुरतज़ा के लाल ने
नाज़ करती है खुदाई मुरतज़ा के लाल पर
हक के वादे को निभाया मुरतज़ा के लाल ने
पेशकश जो थी यज़ीदों की उसे ठुकरा दिया
सर नहीं अपना झुकाया मुरतज़ा के लाल ने
मौत भी बेकार दावर है शहीदों के लिए
काम ऐसा कर दिखाया मुरतज़ा के लाल ने