70. ज़हरा वाले

 

 

दीन को ज़िंदा किये हैं ये मुरतज़ा वाले

न हटे पीछे कभी आखा कर्बला वाले

 

बेवफ़ाई किये हुसैन से कूफ़े वाले

और वफ़ादार रहे देखो ये ज़हरा वाले

 

शान बाकी रही इस्लाम हुआ है ज़िंदा

झंडा लहरा दिए इस्लाम का शहदा वाले

 

आज भी नाम है ज़िंदा मेरे सुल्तानों का

मिट गये सारे ज़माने से उमय्या वाले

 

मक्का वालों कभी माफ़ न करना मौला

क्या क्या ढायें सितम आका ये मक्का वाले

 

शर्त बैयत की रखा था इन्हीं गद्दारों ने

आज़माने को गए थे इन्हें ज़हरा वाले

 

दीन की शान बचाई है मेरे इब्न-ए-अली

जान-ओ-ईमान भी क़ुर्बान ऐ मौला वाले

 

पंजतन पर थे किये ज़ुल्म सितम पहले भी

सारे शैतान की औलाद उमय्या वाले

 

शाह कर्बल को ये दावर के हज़ारों हैं सलाम

ले लो आका मेरे सुल्तान ऐ ज़हरा वाले

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