पढ के कुरआन मानी को समझा नहीं दूसरों को समझाने से क्या फायदा!
पहले खुद दरस ले और मानी समझ उलटा मतलब बताने से क्या फायदा!!
फरक मन् अरफ में और कद अरफ में कितना है तुझको मालूम शायद नहीं!
नहनु व अकरब को पहले जरा जान ले झुटा जल्वा दिखाने से क्या फायदा!!
जो वजूद तीलावत् में गूम् होगया दीन व इमान को बस वही पालिया!
बेखुदी और खुदी को जो जाना नहीं सर पे कुरआन उठाने से क्या फायदा!!
तू समझता है माबूद जब एक है एक ही होगा दर् दूसरा तो नहीं!
फिर ये सजदों की बोछार किसके लिए हर जगा सर झुकाने से क्या फायदा!!
तुझको जाहिद मुबारक हो मस्जिद तेरी बुतकदा का सनम् है हमारा खुदा!
जिन नमाजों में रब्ब की न मेअराज हो वो नमाजें पढ़ाने से क्या फायदा!!
तू निगाहों से अपनी पिला दे जिसे जिन्दगी भर उसे होश आता नहीं!
तेरी नजरों से पी कर जो बाहोश है उसको साकी पिलाने से क्या फायदा!!
जब मजा है के हो फायदा गैरों को गैर चाहते हैं दावर वो सजदा करें!
रोशनी दूसरों को जा जिस से मिले शम्मा ऐसी जलाने से क्या फायदा!!