68. सजदे में आना सीख ले

 

 

खुदा का देख कर सर को झुकाना सीख ले!

तू है कयाम में सदा सजदे में आना सीख ले!!

 

अपनी नमाज आप ही पढता है अर्श पर खुदा!

तू भी नमाज खुद्द की खुद्द को पढाना सीख ले!!

 

हरदम् सजूद में रब्ब उस का हमें पता नहीं!

कौन खुदा क्य है खुदा राज छुपाना सीख ले!!

 

करता है सजदा तू यँहा किस का वो सजदा कर बयाँ!

मुर्शद के पास आ मेरे भेद ये पाना सीख ले!!

 

करके खुदा को सजदे भी इब्लीस लानती हुआ!

जाहिर में कुच्छ मजा नहीं बातिन में जाना सीख ले!!

 

जब लुत्फ है नमाज में सजूद भी हो रूबरू!

तू है कहीं तो वो कहीं नज़रों में लाना सीख ले!!

 

दावर  तेरा वजूद भी रहता है बस् सजूद में!

कुन्न से निकल जा बे खतर फैकुन् में आना सीख ले!!

 

 

(सलाम करने दो  दावर  तुम माहा पारों को!

नज़र में बस के जीया बक्शि दिल के तारों को!!)

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