खुद ही बिमार खुदा था मुझे मालूम ना था!
नाम अहमद् में दवा था मुझे मालूम ना था!!
चार अनासिर से बना कर हुआ गुम् आप ही आप!
वाह क्या कालू बला था मुझे मालूम ना था!!
आप अपने ही को मैं ढूंडने निकला दर दर!
मुझ में मेरा ही पता था मुझे मालूम ना था!!
कह दिया उस ने के शहा रग् से भी नजदीक हूँ मैं!
मेरी आँखों में छुपा था मुझे मालूम ना था!!
अपने जैसा ही बना कर कहा आदम मुझको!
जिसमे आदम में खुदा था मुझे मालूम ना था!!
गौर से देखा जो खुद को नजर आया वो भी!
एक पल् भी ना जूदा था मुझे मालूम ना था!!
आलमे होश में मैं करलिया सजदा दावर!
मेरा मुर्शद ही खुदा था मुझे मालूम ना था!!