मौला ये कायेनात अली मुरतज़ा अली
है इब्तिदा अली अली और इंतिहा अली
जो मुश्किलों में है वो अली को पुकार ले
हैं दाफिल बला वही शेर-ए-ख़ुदा अली
इस नाम-ए-पाक की ज़रा तासीर देखिए
पोशीदा कायनात है नाम-ए-ख़ुदा अली
रब ख़ुद को देखने की तमन्ना अगर करे
हक़ कायिनात को देखने का आईना अली
इरफ़ान आरिफ़ों को अली से हुआ अता
इरफ़ान के ख़ज़ाने के हैं बादशाह अली
वस्फ़े अली के वास्ते अल्फ़ाज़ ही नहीं
तौसीफ़ क्या बयान हो शेर-ए-ख़ुदा अली
जाए न राइगां कभी दावर की इल्तिजा
तुम को मेरे हुज़ूर का है वास्ता अली