अहद् वो अहमद् का फलक पर है मिलन आज की रात!
अर्श आज़म् नज़र आता है चमन आज की रात!!
अर्श भी आपके नालैन को बोसा देगा!
क्यों ना झूमेंगा भला सारा गगन् आज कि रात!!
अर्श आज़म् नज़र आता है चमन आज की रात!
नीन्द व गफलत में थी सोई हुई सारी दुनियाँ!!
पेच कल्मे की खुली होके मगन आज की रात!
अर्श आज़म् नज़र आता है चमन आज की रात!!
आईना मीम में दो शकल नज़र आती है!
एक आवाज है और एक सुखन आज की रात!!
अर्श आज़म नज़र आता है चमन आज की रात!
खोल कर रख दिया माबूद ने गँजे मखफी!!
अब्द माबूद की चमके गी किरण आज की रात!
अर्श आज़म् नज़र आता है चमन आज की रात!!
वाअतै रब्ब ही नहीं वाअतै शाहे आलम्!
दो जबाँ एक हुई एक है मन् आज की रात!!
अर्श आज़म नज़र आता है चमन आज की रात!
क्यों ना सर कोये मोहम्मद में झुकाऊँ दावर!!
आये किस शान से वो शाहे जमन आज की रात!
अर्श आज़म् नज़र आता है चमन आज की रात!!