आप पर जान भी क़ुर्बान रसूल-ए-अरबी
आप पर है मेरा ईमान रसूल-ए-अरबी
हम को तफ़रीक़ न थी क्या है गुनाह नेकी
आप करवा दिए पहचान रसूल-ए-अरबी
जान-ओ-ईमान से बढ़ कर के यहाँ कुछ भी नहीं
आप पर दोनों भी क़ुर्बान रसूल-ए-अरबी
आप सा कोई भी हमदर्द ज़माने में नहीं
आप बख़्शे हमें इरफ़ान रसूल-ए-अरबी
आप सा कोई नबी हो नहीं सकता पैदा
आप नबियों के हैं सुल्तान रसूल-ए-अरबी
आप का कहना यक़ीनन है ख़ुदा का कहना
जो ख़ुदा समझे वो नादान रसूल-ए-अरबी
आप के सदक़े से ईमान है मयस्सर हम को
इसी बाइस है हमें शान रसूल-ए-अरबी
आप की बात पे कंकर भी पढ़े हैं कलमा
हम से अच्छे हैं वो बेजान रसूल-ए-अरबी
नाज़ करते हुए आएगा हश्र में दावर
भर दिए सीने में इरफ़ान रसूल-ए-अरबी