60. रसूल-ए-अरबी

 

 

आप पर जान भी क़ुर्बान रसूल-ए-अरबी

आप पर है मेरा ईमान रसूल-ए-अरबी

 

हम को तफ़रीक़ न थी क्या है गुनाह नेकी

आप करवा दिए पहचान रसूल-ए-अरबी

 

जान-ओ-ईमान से बढ़ कर के यहाँ कुछ भी नहीं

आप पर दोनों भी क़ुर्बान रसूल-ए-अरबी

 

आप सा कोई भी हमदर्द ज़माने में नहीं

आप बख़्शे हमें इरफ़ान रसूल-ए-अरबी

 

आप सा कोई नबी हो नहीं सकता पैदा

आप नबियों के हैं सुल्तान रसूल-ए-अरबी

 

आप का कहना यक़ीनन है ख़ुदा का कहना

जो ख़ुदा समझे वो नादान रसूल-ए-अरबी

 

आप के सदक़े से ईमान है मयस्सर हम को

इसी बाइस है हमें शान रसूल-ए-अरबी

 

आप की बात पे कंकर भी पढ़े हैं कलमा

हम से अच्छे हैं वो बेजान रसूल-ए-अरबी

 

नाज़ करते हुए आएगा हश्र में दावर

भर दिए सीने में इरफ़ान रसूल-ए-अरबी

-+=
Scroll to Top