सुन ले फरियाद मेरी मेरे मेहरबाँ!
छोड़ कर तेरा दर मैं जाँऊ कहाँ!!
तू ही मालिक मेरा और शहनशाह है!
मिला मेरी जबीं को तेरा आसताना!!
तेरा नजरे करम मुझपे एकबार हो!
है यकिन बनके चमके मेरा हर गुमाँ!!
बचा शिर्क से कुफ्र से हर घड़ी!
तेरे नूर से है ये रोशन जहाँ!!
गुरूर व हसद से हमें दूर कर!
रहे हक् पे हर दम् चले कारवाँ!!
तू हम को बचा नफ्स के जाल से!
न पास आये यारब रियाकारियाँ!!
हमारे दिलों को जिला बख्श दे!
असर जाये ना अब कोई रायेगाँ!!
मिले कब्र में रोशनी भी तेरी!
के राजी हों हम से मकीं और मकाँ!!
गुलामी में दावर को अपनी तू ले!
`रफीक` वो मुनव्वर भी हो शादमाँ!!