ना दौलत् चाहिए मुझको ना हाजत से सिवा देना!
मुझे अपना बनाये हो तो खादर आसरा देना!!
मैं अदना खाके पाहूँ बजम् दो आलम में ऐ खादर!
बना कर अपनी खुदरत से न तुम मुझको मिटा देना!!
बचालो मुझको गम से अब मुझे तुम क्यों सताते हो!
मैं बिमारे अलम् हूँ अपने दामन की हवा देना!!
मैं अपने तन में कुरआन की तिलावत् रोज करता हूँ!
तहजूद भी कजा होती नहीं खादर जजा देना!!
तुम्हारे नाम का ही जिक्र है हर वक्त सीने में!
नहीं आसाँ तुम्हारे नाम को खादर भुला देना!!
भरा है दिल में दुनियाँ वालों के कीना हसद खादर!
जो गुजरों दरमियाँ से उन के साये से बचा देना!!
गुजारिश है यही मेरी रफीक आका से ऐ दावर!
किसी दिन रूबरू आकर मुझे जल्वा दिखा देना!!