51. कश्ती भंवर से निकालो

 

मुहम्मद प्यारे मैं आऊँ तोरे तैबा को जी

रास्ता कठिन है तैबा नगर का
किस तरह आऊँ ऐ मेरे मौला

ज़र है न पर है मेरे आका
तुम बिन वसीला है कौन मेरा

मुहम्मद प्यारे मैं आऊँ तोरे तैबा को जी

अरमान है मुझको हर घड़ी हर पल
आऊँ मैं तैबा को हिंद से चल

तुम बिन ये मुश्किल कौन करे हल
बुलवाओ मुझको ऐ शाह-ए-अकमल

मुहम्मद प्यारे मैं आऊँ तोरे तैबा को जी

घर है न दर है शैदा को अपने
जाए मदीना क़िस्मत हो अपने

परवान जान क़दमों पे अपने
शमा पे रोशन गर है वो जलते

मुहम्मद प्यारे मैं आऊँ तोरे तैबा को जी

सौदा है सर में वहदत का अपने
किस पर गिला है क़िस्मत का अपने

आज़िज़ हूँ ऐसा रहमत का अपने
सानी नहीं है क़ुदरत का अपने

मुहम्मद प्यारे मैं आऊँ तोरे तैबा को जी

ऐ मेरे आका मुझको बुला लो
हिंद से मुझको जल्दी बुला लो

डूबा हुआ हूँ ग़म में अपने तिरा लो
कश्ती भंवर से मेरी निकालो

मुहम्मद प्यारे मैं आऊँ तोरे तैबा को जी

रोज़-ए-हश्र के आप हो सानी
है कौन हमसर आपका सानी

ऐ मेरे दावर चेहरा नूरानी
है कौन तुम सा दो जग में सानी

मुहम्मद प्यारे मैं आऊँ तोरे तैबा को जी

ऐ मेरे गोहर मुनव्वर तुम्हारा
ऐ मेरे रहबर आफ़त का मारा

इसको बुला लो जल्द ख़ुदारा
ये है सना ख़्वां मुनव्वर तुम्हारा

मुहम्मद प्यारे मैं आऊँ तोरे तैबा को जी

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