काहे हू की बजाई बाँसुरी!
काहे हू की बजाई बाँसुरी!!
नाच पडत् हूँ अपने अंगनवा!
लाज न जानू मोरे सजनवा!
सर पे है मोरे सारा गगनवा!
झूम उठे हैं दोनो नैननवा!
काहे हू की बजाई बाँसुरी!
काहे हू की बजाई बाँसुरी!!
मैं तो गई थी पनिया भरन को!
चैन न आवा प्यासी नयन को!
देखन लागी अपने चरण को!
लौट गयी मैं पी के बन को!
काहे हू की बजाई बाँसुरी!
काहे हू की बजाई बाँसुरी!!
नट खट मोरे छैल छबीले!
चोर मखन् के सांज रसी ले!
मोरे जिया में आके बसी ले!
कृश्न कन्हय्या काले पीले!
काहे हू की बजाई बाँसुरी!
काहे हू की बजाई बाँसुरी!!
सुध बुध अपनी सब बिसराई!
दौड़ चरण में तोरे आई!
लोग कहत हैं सब हरजाई!
गोकुल गलियाँ रास न आई!
काहे हू की बजाई बाँसुरी!
काहे हू की बजाई बाँसुरी!!
राधा तोरी दासी तोरी!
तोड न देना पीत् की डोरी!
मोरी गगरीया का हे फोडी!
पकड़ी गई है तोरी चोरी!
काहे हू की बजाई बाँसुरी!
काहे हू की बजाई बाँसुरी!!
ओढी रफीकी मैं ने चुन्दरिया!
सरपे है मोरे प्यारी बदरिया!
आई हूँ मुरशद तोरी अटरिया!
दावर दासी की है नगरिया!