48. होली

 

 

मोरे मुर्शद के अंगना में होली है!

आवो आवो सखीरी रंग चोली है!!

 

आज सब की चुँदरया रंगी जायेगी!

ओढनी आज सब की भी लहरायेगी!

हर तरफ देखो वहदत् की बोली है!

मोरे मुर्शद के अगंना में होली है!!

 

फरक अन्ता अना का भी मिट जायेगा!

एक रंग में देखो रंग जायेगा!

कितनी प्यारी ये आँख मचोली है!

मोरे मुर्शद के अंगना में होली है!!

 

गँजे मखफी से बाहर भी आयेगा ओ!

कुन्तु कंजन की पिचकारी लायेगा ओ!

जिस्म पर ऐनुमा की भी चोली है!

मोरे मुर्शद के अंगना में होली है!!

 

आज लैलाक वाले की क्या शान!

आज कालु बला का ये ऐलान है!

आज जाहिर व बातिन् की टोली है!

मोरे मुर्शद के अंगना मै होली है!!

 

ला से आयेगा कोई इला की तरफ!

मुदई जाये गा मुढुआ की तरफ!

एक दूजे की देखो ठठोली है!

मोरे मुर्शद के अंगना में होली है!!

 

मस्त भी आयेंगे और कलन्दर यहाँ!

खूब खेलेंगे होली बराबर यहाँ!

कितनी तस्वीर दिल में समोली है!

मोरे मुर्शद के अगंना में होली है!!

 

गंजे गोहर से गोहर भी आजायेंगे!

आज तशरीफ वाहिद अली लायेंगे!

राह में सब ने आँखें बिछोली है!

मोरे मुर्शद के अंगना में होली है!!

 

आज दादा मुनव्वर की आमद भी है!

इश्तियाक आज इस दिल में बेहद है!

होगा दीदार सब का ये बोली है!

मोरे मुर्शद के अंगना में होली है!!

 

मेरे मुर्शद रफीकी नगरिया है ये!

कितना प्यारा हमारा संवरिया है ये!

साथ  दावर  के बच्चों की टोली है!

मोरे मुर्शद के अंगना में होली है!!

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