मदीने वाले के कदमों में मर जाता तो अच्छा था!
मुकद्दर उनकी चौखट पर संवर जाता तो अच्छा था!!
मदीना जाके क्यों तू लौट आया अपने घर नादाँ!
अरे कंबख्त उन के दर पर मर जाता तो अच्छा था!!
मौजन क्यों ज़बा पर ला रहा है नाम हज़रत का!
बिलाले हबशी बन् वक्ते सहर जाता तो अच्छा था!!
कटाया करबला में फातिमा के लाल ने सर् को!
अये जाहिद सजदे में तेरा भी सर् जाता तो अच्छा था!!
गया था खर भी एक्दिन हज् की खातिर साथ ईसा के!
वो हाजी अगर बन् के गुजर जाता तो अच्छा था!!
पिया है शेख तू ने वसले हक् का एक पैमाना!
तू बेहोशी के आलम में ही रह जाता तो अच्छा था!!
मुनव्वर के गुलामों में हूँ दावर फक्र है मुझको!
रफीक आका के संगे दर पे मर जाता तो अच्छा था!!