43. पारसाई है

 

 

मेरी उनसे ही आश्नाई है

जिसने क़िस्मत मेरी बनाई है

 

वो सिखाए सबक भलाई का

उनके दम से ही पारसाई है

 

वो सलीक़ा सिखा जीने का

ज़िंदगी उनसे रंग लाई है

 

जब से दिल उन पे हो गया शैदा

ज़िंदगी में बहार आई है

 

मैं अज़ल से ही उनका दीवाना

उनकी उल्फ़त अज़ल से आई है

 

उनकी उल्फ़त से दिल हुआ रोशन

मैंने दौलत बड़ी कमाई है

 

जिनकी उल्फ़त में मस्त है दावर

उनके ख़ातिर ये सब ख़ुदाई है

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