42. या रब्बी सल्लू अलैहि व सल्लम

 

 

अल्लाह हुमा सल्लि अला मुहम्मद या रब्बी सल्लू अलैहि व सल्लम

हो आप खैर-उल-वरा मुहम्मद या रब्बी सल्लू अलैहि व सल्लम

 

हम थे रब की दीद के प्यासे आए मुहम्मद अर्श अला से

जलवा खुदा का दिखाए मुहम्मद या रब्बी सल्लू अलैहि व सल्लम

 

ग़फलत में हम डूब गए थे अपने खुदा को भूल गए थे

हम को खुदा से मिलाए मुहम्मद या रब्बी सल्लू अलैहि व सल्लम

 

नफ़्स खुदी से हम को बचाकर राह खुदा पर चलना सिखाए

आख़ा मेरे किब्रिया मुहम्मद या रब्बी सल्लू अलैहि व सल्लम

 

कुफ्र का कलमा हम पढ़ते थे बुत को सजदा भी करते थे

कुफ्र से हम को हटाए मुहम्मद या रब्बी सल्लू अलैहि व सल्लम

 

करते थे सजदा तो लेकिन सजदा था वो ग़ैर खुदा का

ऐन इबादत सिखाए मुहम्मद या रब्बी सल्लू अलैहि व सल्लम

 

मन अरफा था एक मुअम्मा कद अरफा का होश भी ना था

दो खुलासा कराए मुहम्मद या रब्बी सल्लू अलैहि व सल्लम

 

हम तो दहर में भटके हुए थे राह-ए-हक़ से दूर हुए थे

रास्ते पे हमको हैं लाए मुहम्मद या रब्बी सल्लू अलैहि व सल्लम

 

दावर का ईमान नबी पर जिस्म-ओ-जान क़ुर्बान नबी पर

ईमान-ओ-सब का सजाए मुहम्मद या रब या रब्बी सल्लू अलैहि व सल्लम

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