40. सरकार का सदका

 

 

मोहम्मद मुस्तफा देंगे रूख अनवार का सदका!

हमारे वासते काफी है उन के प्यार का सदका!!

 

गुलामाने मोहम्मद् की तमन्ना है तो इतनी है!

मुकद्दर से कभी मिल जाये बस् दीदार का सदका!!

 

दयारे मुस्तफा में कह रहे हैं उनके दीवाने!

खुदा तू भेज दे हमको शहे अब्रार का सदका!!

 

मदीने की गली में काश किस्मत से जो मिल जाये!

मैं आँखों से लगालूँगा मेरे सरकार का सदका!!

 

यही है आरजू शम्स व कमर की रोज़े अव्वल से!

अता करदे इलाही गेसुये खम्दार का सदका!!

 

परेशाँ हाल है गरदों पे तारे माहे अंजुम भी!

खुदा हिस्से में उन के भेजदे रुखसार का सदका!!

 

मोहम्मद मुस्तफा की याद से गाफिल नहीं दावर!

छुपाकर रखलिया हूँ दिल में उस दरबार का सदका!!

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