थी अज़ल में नूर की गोया चमकती ओढनी!
अर्श पर कन्दील थी कन्दील में थी ओढनी!!
मुस्तफा समझे खुदा जाने बस् उसकी शान को!
अर्श से जिस दम् यहाँ उतरी झलकती ओढनी!!
सूरत ला में छुपी है और इला से है मुकीम!
ओढकर निकले नबी सोल्ले अला की ओढनी!!
मौत कब्ल अन्ता मौत ओढनी पर है लिखा!
लाई मौत से हुई जिन्दा अनोखी ओढनी!!
दर्ज हैं उस ओढनी में पंजतन् के पाँच नाम!
है मेरे सरकार की क्या शान वाली ओढनी!!
फातिमा ओढे हैं जिस को और ओढे मुरतुजा!
कुल पैयंबर औलिया ओढे निराली ओढनी!!
बीच में लिखा है जिस के या मोहम्मद मुस्तफा!
ओढे हैं दावर खुशी से वो रफीकी ओढनी!!