36. कदमों की धूल हूँ

 

 

मैं ख़ाक हूँ रसूल के खदमों की धूल हूँ

ख़ादिम हूँ ख़ाकसार हूँ उम्मत रसूल हूँ

 

ख़ुशबू रसूल पाक की दिल में बसे न क्यों

यशरब के बाग़बान के गुलशन का फूल हूँ

 

फ़रमान-ए-मुस्तफ़ा पे ये हस्ती मेरी निसार

मैं जान भी गँवा दूँगा ऐसा उसूल हूँ

 

उम्मत हूँ मैं रसूल का करता हूँ पैरवी

ये इब्तिदा है इश्क़ की अब से नुज़ूल हूँ

 

मैंने किया था वादा जो रोज़-ए-अलस्त में

दुनिया में उसको भूला तो फिर भी फ़ुज़ूल हूँ

 

इनसान की सिफ़त मेरे अंदर ज़रूर है

शैदाए पंजतन हूँ मैं इश्क़-ए-रसूल हूँ

 

दावर को हाल याद है रूह-ए-अलस्त का

इस वास्ते मैं सरवरी घर को क़बूल हूँ

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