उठो ताजीम को सरकार हमारे आये!
सर्वरे दीन के सालार हमारे ये!!
नाज क्यों कर न करें उन पे खुदाइ सारी!
खातिमुल् अम्बिया गमख्वार हमारे आये!!
ऐ नज़र चूम ले हर जर्राये तैबा बढकर!
जो तलब थी वो तलबगार हमारे आये!!
बारहवीं रात की महफिल में यकीं है हम को!
फातिहा ख्वानी में दिलदार हमारे आये!!
अर्श का पाया पकडकर ये कहेंगें आका!
बक्श दे मौला गुनाहगार हमारे आये!!
देखती क्या है गुनाहगारों की जानिब दोज़क!
देख ले वो शहे अब्रार हमारे आये!!
ओढ कर कमली नबी आयेंगे जिस दम् दावर!
अंबिया बोलेंगे सरदार हमारे आये!!