32. नस्र मिन अल्लाह वा फतहुन क़रीब

 

 

उम्मती बनाए हैं ख़ुदा के हबीब

नस्र मिन अल्लाह वा फतहुन क़रीब

 

मेरे नबी का मुझको वसीला है मिल गया

जब मिल गए नबी ये मुक़द्दर संवर गया

हैं मेरी मदद को ख़ुदा के रक़ीब

नस्र मिन अल्लाह वा फतहुन क़रीब

 

मेरे नबी से मेरी हमेशा है इल्तिजा

मेरे नबी से मुझको हमेशा है वास्ता

दर्द-ए-दिल के वास्ते वही हैं तबीब

नस्र मिन अल्लाह वा फतहुन क़रीब

 

वो हैं मेरे हामि वो हैं मुद्दुवा

मेरा हाल उनसे कभी न छुपा

हाल-ए-दिल से वाक़िफ़ हैं मेरे मुजीब

नस्र मिन अल्लाह वा फतहुन क़रीब

 

हर बला से हम को बचाते हैं नबी

मोमिनों की आफ़त टलाते हैं नबी

ये मेरा मुक़द्दर ये मेरा नसीब

नस्र मिन अल्लाह वा फतहुन क़रीब

 

आशिक़ों पे आख़ा मेहरबान हैं

ख़ादिमों के आख़ा निगहबान हैं

गर्दिशें हमारी टलाते हैं हबीब

नस्र मिन अल्लाह वा फतहुन क़रीब

 

मेरे नबी तो हैं रहबर-ए-ज़मां

मुरीदों की हालत है उन पे सब अयां

है मक़ामे दावर रफ़ीक़ के क़रीब

नस्र मिन अल्लाह वा फतहुन क़रीब

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