3. इनाम बिस्मिल्लाह

 

 

इब्तिदा काम जो किया है खुदा लेके अपना ही नाम बिस्मिल्लाह

जब हिदायत किया मोहम्मद को देके अपना सलाम बिस्मिल्लाह

 

जब ज़ुबां पर यह नाम आता है बिगड़ा हर काम संवर जाता है

कैसी तासीर है यह जुमले में आशिकों पर इनाम बिस्मिल्लाह

 

हर मुसीबत से यह बचाता है सबके ईमान को सजाता है

मुश्किलें सबकी यह टलाता है कितना ऊँचा मकाम बिस्मिल्लाह

 

इस्म-ए-आज़म की जान है इसमें मेरे मौला की शान है इसमें

यही मुर्दो में जान लाता है इस्म-ए-आज़म है नाम बिस्मिल्लाह

 

इसको पाकर के इब्न-ए-मरियम ने ठोकरें से जिलाए हैं मुर्दे

आग को गुल यह कर दिखाया है देखो रब का निज़ाम बिस्मिल्लाह

 

एक आयत है मुख़्तसर लेकिन इसमें छुप कर खुदा की कुदरत है

ज़हर अमृत का काम करता है है यह खुदरत का जाम बिस्मिल्लाह

 

सर पे क़ुरान के यह ताज बना दर्द-ए-दिल का यही इलाज बना

तेरे दिल का क़रार है दावर गुनगुना तू मुदाम बिस्मिल्लाह

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