27. सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम्

 

 

शाहे दो आलम् दीन के सर्वर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम्!

आप पे कुरबों आप का  दावर  सलाहु अलाह वसल्लम्!!

 

मेरी नज़र में बागे मदीना डूबे ना आका मेरा सफीना!

लेना खबर तुम शाहे पयम्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!!

 

शम्स है चेहरा लैल है जुल्फें गोया है कुआँ दहने मुबारक!

यासीन व ताहा तुमपे निछावर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!!

 

सारी खुदाई तुम पे है सदके काबे का काबा आप का रोजा!

शाम व सहर है नूर का मँजर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!!

 

तिश्न दहन है चाहने वाले हश्र में आका गर्मी कड़ी है!

नज़रे करम हो साकिये कौसर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!!

 

रोजा मुझे एक बार दिखा दो प्यासी नज़र की आका बुझा दो!

दूर रहूँ मैं आप से क्योंकर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!!

 

तुम ही रफीक व मोनस मेरे याद से मेरा दिल है  मुनव्वर!

चूम के जाली कहता है  दावर  सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!!

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