24. अल्लाह हू

 

 

अल्लाह हू अल्लाह हू

अल्लाह हू अल्लाह हू

 

यह ज़मीन जब न था यह फ़लक जब न था

किस जग और कैसे था यह मा-सिवा

कौन उल्टा भला पर्दा इस राज़ का

पूछ दिल से तो अपने तो देगा पता

 

अल्लाह हू अल्लाह हू

अल्लाह हू अल्लाह हू

 

जब के तन्हा था ख़ालिक हर दो सदा

जोश वहदत में भरा मुहम्मद कहा

जलवा-ए-कुन से नूरे मुहम्मद हुआ

और फ़ैकुन से तख़लीक कुल हो गई

 

अल्लाह हू अल्लाह हू

अल्लाह हू अल्लाह हू

 

हिं उन्हीं के है दम से दोनों जहां

वो न होते तो कुछ भी न होता यहां

यह ज़मीन और ज़मां गुलशन बहर-ओ-बर

झूम कर के पुकारे हैं शम्स-ओ-क़मर

 

अल्लाह हू अल्लाह हू

अल्लाह हू अल्लाह हू

 

बाद अज़ां हक़ ने आदम को पैदा किया

राज़ जो कुछ था आदम पे ज़ाहिर किया

सुन मलाइक ने आदम को सजदा किया

और आदम ने उसका वज़ीफ़ा किया

 

अल्लाह हू अल्लाह हू

अल्लाह हू अल्लाह हू

 

तू ने यूसुफ़ को अदना से आला किया

इब्ने दाऊद को शाह दुनिया किया

तू ने फ़िरऔन को ग़र्खे दरिया किया

तू ने मूसा को दरिया में रास्ता दिया

 

अल्लाह हू अल्लाह हू

अल्लाह हू अल्लाह हू

 

तू ही मूसा को बे-होश है कर दिया

और मुहम्मद को मेराज है दे दिया

गंज गोहर को तू ने यह रुतबा दिया

और मुनव्वर को ऐसा मुक़द्दस किया

 

अल्लाह हू अल्लाह हू

अल्लाह हू अल्लाह हू

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