20. मेरा वक़ार है

 

 

तेरी इनायतों पे मुझे ऐतबार है

तू ही नवाज़ता है तुझे इख़्तियार है

 

तेरे करम के सदक़े मेरी ज़िंदगी बहाल

तू कारसाज़ रब है तू ही किर्दगार है

 

जीना भी तेरे हाथ है मरना भी तेरे हाथ

आख़ा-ए-कायनात है परवरदिगार है

 

तेरी शना से दिल को तसल्ली सरूद है

तेरे ही ज़िक्र से मेरे दिल को क़रार है

 

नफ़्स अद‌द से जुमले की जुर्रत तू दे मुझे

करार मुझको कर दे मेरा बेड़ा पार है

 

तू ही करीम तू ही तू सत्तार है मेरा

मैं भेद हूँ फ़क़त तू मेरा राज़दार है

 

दावर पे हैं रफ़ीक़ के एहसान हज़ार हा

बदले में एक सजूद के मेरा वक़ार है

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