परदा दारे दो जहाँ बाहर निकल!
खालिके कौन वो मकाँ बाहर निकल!!
आखरश कब् तक छुपेगा हमसे तू!
हम शबीह इन्स व जाँ बाहर निकल!!
कुन्तु कुंजन् मखफीयन् कहता रहा!
मालिके हर राजदाँ बाहर निकल!!
हुवल्जाहिर कहदिया तू अये खुदा!
होगया तू भी अयाँ बाहर निकल!!
गँजे मखफी से हुआ तेरा जहूर!
राज दारे दो जहाँ बाहर निकल!!
आईने में हूँ मेरा तू अक्स है!
सूरते आदम् की जाँ बाहर निकल!!
तू ने खुद्द ही कह दिया अन्त अना!
ऐ मेरे शायाने शान बाहर निकल!!
आशिक वो मअशौक में परदा नहीं!
क्यों छुपा है दरमियाँ बाहर निकल!!
ऐनुमा ने कर दिया साबित तुझे!
सुन के दावर की जबाँ बाहर निकल!!