है ख़ुदा पाक ज़ात बिस्मिल्लाह
आरिफ़ों की सिफ़ात बिस्मिल्लाह
ख़िज्र और इदरीस पी के ज़िंदा हैं
है यह आब-ए-हयात बिस्मिल्लाह
कुन में सदियों से सोचता था ख़ुदा
इसी फैकुन की बात बिस्मिल्लाह
जब भी क़ुरान कोई पढ़ता है
सबसे पहले क़ुरात बिस्मिल्लाह
अर्शे अज़म पे जब गए आका
थी वह शब-ए-बरात बिस्मिल्लाह
नूर से मुस्तफ़ा के है यह जहां
क़ुर्ब-ए-हक़ काइनात बिस्मिल्लाह
औलिया भी बक़ा, ख़ुदा भी बक़ा
समझो क्या है निकत बिस्मिल्लाह
पाक कलिमा ज़बां पे जब आए
करना पाकी की बात बिस्मिल्लाह
मौत बेकार हो गई दावर
जब है तेरे साथ बिस्मिल्लाह