160. बारे अमानत है जिन्दगी

 

 

नज़रे करम से तेरे सलामत है जिन्दगी!

मेरे लिए तो बारे अमानत है जिन्दगी!!

 

जिस दिल में है खुलूस उसी दिल् में है खुदा!

कीना हसद है जिस में कयामत है जिन्दगी!!

 

आशिक तो मिले तो मिले उसको दो जहाँ!

सच पूछिये तो वरना नदामत है जिन्दगी!!

 

नूरे नज़र में नूरे खुदा नूरे मुस्तफा!

दिल नूर होगया है इबादत है जिन्दगी!!

 

हाजिर हुआ है रुबरु और देदिया हयात!

और कैह दिया के सोच अमानत है जिन्दगी!!

 

सालिक बनाया तू ने तो मजज़ूब क्यों बनूँ!

रखूँगा सादगी से इनायत है जिन्दगी!!

 

उन का खयाल उनका तसव्वर नज़र में है!

दावर यकीन जानो करामत है जिन्दगी!!

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