155. मजलिसे मौलूद शाहे अम्बीया

 

 

मजलिसे मौलूद शाहे अम्बीया की शान है!

दोनों आलम् से निराली मुस्तफा की शान है!!

 

आमिना की गोद में जिस वक्त आये मुस्तफा!

अर्श पर ये शोर उठा आमिना की शान है!!

 

पीर का दिन था मेरे सरकार की आमद हुई!

बुत् गिरे काबा में ऐसी मुस्तफा की शान है!!

 

दी खलील अल्लाह और ईसा ने आमद की खबर!

किस कदर ऊँची हबीबे किबरिया की शान है!!

 

चेहरा है वश्शम्स तो वल्लैल जुलफें आपकी!

वाह क्या तफसीर कुरआन मुस्तफा की शान है!!

 

सूरे ताहा मुजम्मिल है इशारा कर दिया!

कह दिया यासीन भी ये मुस्तफा की शान है!!

 

काली कमली हश्र में बखशिश का सामाँ बन् गई!

हौजे कौसर पर मेरे वो साकिया की शान है!!

 

हर पैयम्बर चाहते थे उम्मती हों आपके!

गेसू वाले मुस्तफा वो औ दिलरुबा की शान है!!

 

सर झुका दो उन के कदमों में अभी दावर हजीं!

कितनी आला देखो मेहबूब खुदा की शान है!!

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