150.जियारत कबर पैयम्बर की

 

 

जियारत कबर पैयम्बर की सुबह दम् होती है ठहरो ठहरो!

ये दर्शन गोहर मुनव्वर की घमा घम् होती है ठहरो ठहरो!!

 

कबर धोओ इतर गुलाबों से!

चढाओ सन्दल पलकों से!

उडाओ फूल को आँखों से!!

 

ये कुदरत गोहर मुनव्वर की सुबह दम् होति है ठहरो ठहरो!

जियारत कबर पयम्बर की सुबह दम् होति है ठहरो ठहरो!!

 

फंस के रंज व मुसीबत में हम!

सर को अपने दरपे किये हैं खम!

हमारे दूर करो तुम गम!

 

ये रहमत गोहर मुनव्वर की सुबह दम होति है ठहरो ठहरो!

जियारत कबर पयम्बर की सुबह दम् होति है ठहरो ठहरो!!

 

ये अपने दर के भिकारी हैं!

हम हाथ को अपने पसारे हैं!

दिलादो भीक तुम्हारे हैं!!

 

ये खैरात गोहर मुनव्वर की सुबह दम होति है ठहरो ठहरो!

जियारत कबर पयम्बर की सुबह दम होति है ठहरो ठहरो!!

 

ये दावर आके खड़ा है दर पर!

झुकाया सर् को है चौखट पर!

बचाना इस को सरे महशर!!

 

दुआ ये रफीक मुनव्वर की सुबह दम् होति है ठहरो ठहरो!

जियारत कबर पयम्बर की सुबह दम होति है ठहरो ठहरो!!

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