148. या नबी सलाम अलैका

 

 

या नबी सलाम अलैका – या रसूल सलाम अलैका!

या हबीब सलाम अलैका – सल्वातु अला अलैक!!

 

मरहबा शम्सुद्दुहा हो!

मरहबा बदरुद्दुजा हो!

मरहबा सदरुल्उला हो!

मरहबा नूरुल्हुदा हो!!

 

नूर बन कर जहाँ में आये!

दीन इस्लाम साथ में लाये!

हक्क का पैगाम जग में फैलाये!

कुफ्र व बातिल् तुम्हीं से थर्राये!!

 

मेरे आका सरापा रहमत हो!

हम गरीबों की आप हाजत् हो!

रोज़े महशर हमारी किस्मत हो!

दोनो आलम में शाने कुदरत हो!!

 

हश्र में होंगे साकीये कौसर!

तश्ना लब होंगे रूबरू अक्सर!

एक निगाहे करम वहाँ हम पर!

देखकर आप को कहे दावर!!

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