145. सलाम

 

 

या नबी सलाम अलैक – या रसूल सलाम अलैक!

या हबीब सलाम अलैक – सलवातु अला अलैक!!

 

सलाम उस पर के जिस ने हमको राहे हक्क दिखाया है!

सलाम उस पर के जिस ने मौला से हम को मिलाया है!

सलाम उस पर के जिस ने दरस इन्सानी सिखाया है!

सलाम उस पर के जिस ने कुफ्र से हम को बचाय है!!

 

या नबी सलाम अलैक – या रसूल सलाम अलैक!

या हबीब सलाम अलैक – सलवातु अला अलैक!!

 

सलाम उस पर के जिस ने रोशनी दी है उजालों को!

सलाम उस पर सुना है जिसने मजबूरों के नालों को!

सलाम उस पर बनाया फूल जिस ने दिल के छालों को!

सलाम उस पर उठाया राह से जो गिरने वालों को!!

 

या नबी सलाम अलैक – या रसूल सलाम अलैक!

या हबीब सलाम अलैक – सलवातु अला अलैक!!

 

सलाम उस पर के जिस के नूर से रोशन हुआ ईमाँ!

सलाम उस पर के जिस पर अर्श से नाजिल हुआ कुरआन!

सलाम उस पर गरीबों बेकसों पर जिस का है इहसाँ!

सलाम उस पर खुदा की कुल खुदाई जिस पे है कुरबाँ!!

 

या नबी सलाम अलैक – या रसूल सलाम अलैक!

या हबीब सलाम अलैक – सलवातु अलाअलैक!!

 

सलाम उसपर के जिस के नाम को हम चूम लेते हैं!

सलाम उसपर के जिस का नाम सब मासूम लेते हैं!

सलाम उसपर के जिस के नाम से मफहूम लेते हैं!

सलाम उसपर अये दावर हम मदीना घूम लेते हैं!!

 

या नबी सलाम अलैक – या रसूल सलाम अलैक!

या हबीब सलाम अलैक – सलवातु अला अलैक!!

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