144. अये इब्ने अली सलाम

 

 

अये फातिमा के लाल निगाहे नबी सलाम!

कर लीजिये कबूल अये इब्ने अली सलाम!!

 

कर्बव बला में देख के वो बेबसी हुसेन!

हर सुबह व शाम करने लगी बेकसी सलाम!!

 

बा अहतराम आज भी ज़हरा के फूल को!

क्यों कर करे न खुल्द की एक एक कली सलाम!!

 

नहरे फिरात प्यासे लबों को तरस गई!

झुक झुक के कर रही हैं तुम्हीं तिश्नगी सलाम!!

 

सूरज की आँख दसवें मोहरम् वो दोपहर!

लीजिये ख़ुदा के वास्ते जाने अली सलाम!!

 

सजदे में सर् कटाया वहाँ आप ने हुसेन!

रो रो के कर रही है यहाँ बन्दगी सलाम!!

 

नामे हुसेन लिख के कलम चूम लेता हूँ!

दावर अदब से करने लगी शायरी सलाम!!

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