मेरे मुर्शद वासील रफीक अली तुम पर लाखों सलाम!
मेरे आरिफे कामिल रफीक अली तुम पर लाखो सलाम!!
तुम्हीं गँज गोहर एकता मेरी जबीं के तुम्हीं हो काबा!
करें न क्यों हम तुम्हीं को सजदा तुम्हारी सूरत खुदा का जल्वा!!
तुम्हीं रहबर मंजिल रफीक – अली तुमपर लाखों सलाम!
मेरे आरिफे कामिल रफीक अली तुम पर लाखों सलाम!!
थे राजे मखफी बताया तुम ने अना का नगमा सुनाये तुम ने!
रिया को दिल से मिटाये तुम ने हकीकी सजदा कराये तुम ने!!
मेरी कश्ती के साहिल् रफीक अली तुम पर लाखो सलाम!
मेरे आरिफे कामिल रफीक अली तुम पर लाखो सलाम!!
ख़ुदा की सूरत नज़र नज़र में नबी का जल्वा जिगर जिगर में!
दुआयें दिल की असर असर में हकीकी रब्ब है बशर बशर में!!
बड़े पीर हो कामिल रफीक अली तुम पर लाखों सलाम!
मेरे आरिफे कामिल रफीक अली तुम पर लाखो सलाम!!
जमाने वाले सता रहे हैं के पारसा आजमा रहे हैं!
रिया का नगमा सुना रहे हैं नमाज क्या है बता रहे हैं!!
करो इन को भी बातिल रफीक अली तुम पर लाखो सलाम!
मेरे आरिफे कामिल रफीक अली तुम पर लाखों सलाम!!
मेरे गँजे गोहर इशारा दे दो मेरे मुनव्वर सहारा दे दो!
ये किश्ती को अब किनारा दे दो के पीर दावर को यारा दे दो!!
मुझे होगये हासिल रफीक अली तुम पर लाखों सलाम!
मेरे आरिफे कामिल रफीक अली तुम पर लाखों सलाम!!