काम न करो ऐसे फिर से कर दिखाना है
जा के हाल दिल अपना फिर उसे सुनाना है
जिस ने ज़िंदगी बख़्शा मौत भी वही देगा
ज़िंदगी भी धोखा है मौत भी बहाना है
ज़िंदगी है दो रोज़ खेल इस ज़माने का
बाद ज़िंदगानी के क़ब्र ही ठिकाना है
उस ने ज़िंदगी देकर क़ौल ये लिया होगा
जब भी मैं बुलाऊंगा तुम को चल के आना है
सांस के भरोसे पर ज़िंदगी सभी की है
फ़ानी ज़िंदगानी है क्या उसे कमाना है
सब यहाँ मुसाफ़िर हैं ये जहाँ सराय है
ये तुम्हें नहीं क़ायम इसको छोड़ जाना है
फ़िक्र-ए-आख़िरत दावर तुम कभी नहीं भूले
याद है सदा तुम को रब को मुँह दिखाना है