है यही ऐलान हम हैं आशिकाने गौसे पाक!
लाये तो कोई ज़रा शायाने शाने गौसे पाक!!
चूम लूँ पल्कों से अपनी और झुकादूँ ये जबीं!
काश मिल जाये हमें वो आस्तने गौसे पाक!!
आशना हम हैं हकीकत् से कहानी क्या सुनें!
किस्सा ख्वाँ हम को सुना तू दास्ताने गौसे पाक!!
होगया वो दाखिले ईस्लाम एक तकरीर में!
जिस ने भी दिल से सुना है बस बयाने गौसे पाक!!
मुस्तफा की बात पर हजरत अली को है यकीन!
जो ज़बान है मुर्तुजा की वो जबाने गौसे पाक!!
कादरी और सर्रवरी है तेग अपने हाथ में!
कब जमाने से हैं डरते आशीकाने गौसे पाक!!
अये फरीश्तो सोच कर आना हमारी कबर में!
मुर्शदे दावर भी हैं एक जाँफशाने गौसे पाक!!
(मदद माँगना है मदद माँग दावर
के दावर मदद से मदद ही मिलेगी)