134. गौसुलवरा मेरी इमदाद करना

 

 

रंज ओ अलम से भी आजाद करना!

गौसुलवरा मेरी इमदाद करना!!

 

शाहे दो आलम के दिलबर तुम्हीं हो!

गौसे-ज़माँ शाने हैदर तुम्हीं हो!

जहरा की आँखों के गोहर तुम्हीं हो!

मीरासे शब्बीर व शब्बर तुम्हीं हो!

 

मजबूर वो बेकस को तुम शाद करना!

गौसुलवरा मेरी इमदाद करना!!

 

या गौस लाखों की बिगडी बनाई!

किश्ती जो डूबी थी उसको तिराई!

चोर को तुमने हक है अब्दाल बनाई!

ठोकर से मुर्दे में भी जान आई!

 

हम को भी आता है फरीयाद करना!

गौसुल्वरा मेरी इमदाद करना!!

 

हम भी तो बन करके आये सवाली!

पलकों से चूमेंगे रोजे की जाली!

मायूस दर से न जायेंगे खाली!

है शान वलीयों में सबसे निराली!

 

हर गिज ना आप हम को नाशाद करना!

गौसुल्वरा मेरी इमदाद करना!!

 

शाने करम मुझपे एक बार करदो!

दावर के दामन को या गौस भर दो!

आके आकाये दावर को अपनी नज़र दो!

दावर की बातों में आका असर दो!

 

हरदम् दावर को तुम शाद करना!

गौसुल वरा मेरी इमदाद करना!!

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