करम की एक नज़र मुझ पर मेरे मुश्किल कुशा कर दो!
मेरे दुशवारियाँ आसान या शेरे खुदा कर दो!!
हवायें तेज चलने लग गई हैं जोरे तूफान से!
मेरी किश्ती सरे साहिल अली मुर्तुजा कर दो!!
तुम्हीं वो हो निकाले तेल मिट्टी की भी हस्ती से!
नज़र एक बूतराबे जानशीने मुस्तुफा कर दो!!
अली हो और वली हो ईल्म के तुम शहर का दर हो!
करम इतना खुदा के वास्ते शेरे खुदा कर दो!!
दरे खैबर उखाडा एक ही नअरा में वो तुम हो!
मुझे थोडी जुराअत् आप अपने से अता कर दो!!
मैं आकर चूमलूँ रोजा की जाली अपनी आँखों से!
वहाँ के वास्ते हमवार मेरा रास्ता कर दो!!
सखावत आप के घर की शुजाअत् आप के घर की!
निगाहें अपने दावर पर जरा मुश्किल कुशा कर दो!!