प्यासा कभी रहता नहीं मस्ताना अली का!
हाथों में लिए फिरता है पैमाना अली का!!
क्योंकर न बुझायें वहाँ तश्ना लबी को!
हर वक्त खुला रहता है मैखाना अली का!!
पूछो ना सवालात कभी उस से नकीरें!
दीवाना अली का है वो दीवाना अली का!!
हजरत हैं शेहरे इल्म का दरवाजा अली हैं!
जो घर है नबी का वही काशाना अली का!!
खाली कोई लौटा नहीं सरकार से उन की!
हे बहरे सखावत् दरे जाना ना अली का!!
दामादे पैयंबर हैं तो जहरा के हैं शोहर!
हर एक से है अन्दाज जुदागाना अली का!!
ऐजाज़ मेरे वासते ये कम नहीं दावर!
हर एक मुझे कहता है दिवाना अली का!!