अता हो हम को अपना आस्ताँ सय्यद कबीर अहमद!
वहीं पीर है हयाते जाविदाँ सय्यद कबीर अहमद!!
तुम्हीं मुर्शद मोहियोद्दीन जीलानी के बरहक है!
तुम्हीं वहदत के हो पीरे मुगाँ सय्यद कबीर अहमद!!
छुपाया जिस को फिर कुदरत ने अपने कारखाने में!
वहीं एक राज कर दो फिर अयाँ सय्यद कबीर अहमद!!
रसाई है कहाँ तक जानते हैं मारीफत वाले!
उठा सकता नहीं सर आसमाँ सय्यद कबीर अहमद!!
थे जितने पेच खम कल्में में जाहिर कर दिये पलमें!
के खोला आप ने राजे निहाँ सय्यद कबीर अहमद!!
नकाबे रूख उठा दो देखलूँ मैं आप का चेहरा!
बस एक जल्वे का तालिब हँ यहाँ सय्यद कबीर अहमद!!
रफाई सिलसिले के आप ही बानी हैं अये दावर!
जबाँ पर है यही एक दास्ताँ सय्यद कबीर अहमद!!