ज़िंदगी तू ही बता मैं क्या करूँ मैं क्या करूँ
मिलता नहीं दिल का पता मैं क्या करूँ मैं क्या करूँ
ये समझता मैं रहा था दिल मेरी जागीर है
इस में है एक दिलरुबा मैं क्या करूँ मैं क्या करूँ
मैं रहा तो तू नहीं तू रहा तो मैं नहीं
हो गया मैं लापता मैं क्या करूँ मैं क्या करूँ
दिल में ये अरमान था यार को सजदे करूँ
यार ही सजदे में था मैं क्या करूँ मैं क्या करूँ
वो है मुझ में अक्स बनकर मैं हूँ उसका आईना
वो है मुझ में देखता मैं क्या करूँ मैं क्या करूँ
वस्ल की हसरत थी मुझको कट गई मेरी ज़बान
वो है मुझ में बोलता मैं क्या करूँ मैं क्या करूँ
तुम ही दावर हो मेरे दावर-ए-महशर तुम्हें
कोई नहीं है दूसरा मैं क्या करूँ मैं क्या करूँ