125. कल्मा पढाया है दोस्तों

 

 

बागे तरीक मुझको दिखाया है दोस्तो!

मेरा रफीक रस्ता बताया है दोस्तो!!

 

मन् अरफ के वो इल्म से बेदार कर दिया!

कद अरफ के वो मानी से होशियार कर दिया!

हबलुल् वरीद दिल में बिठाया है दोस्तो!

मेरा रफीक रस्ता बताया है दोस्तो!!

 

दिल से वो दिल में नक्शा जो मेरे जमाया है!

सातों सिफ्त के दर्शन दरीया समाया है!

गव्वाज़ मुझको उसका बनाया है दोस्तो!

मेरा रफीक रस्ता बताया है दोस्तो!!

 

कल्मे की कल में एक सदफ भी अजीब था!

कुदरत् से अपनी पीर मेरा भी तबीब था!

दुर्रे मुहम्मदी को बिठाया है दोस्तो!

मेरा रफीक रस्ता बताया है दोस्तो!!

 

मेअराजे मोमिन से कायम् किया नमाज!

मैं पंजतन् के नूर का महमूद हूँ अयाज!

कल्बे हजूरी दिल में बसाया है दोस्तो!

मेरा रफीक रस्ता बताया है दोस्तो!!

 

मुर्शद का ये करम है के रब आशना हुआ!

मेरी नजर में यार भी जल्वा नुमा हुआ!

कई बार मुझ को हज्ज कराया है दोस्तो!

मेरा रफीक रस्ता बताया है दोस्तो!!

 

गोहर मकान वाला वो आका स्फीक है!

वो मेहरबान और मुनव्वर शफीक है!

दावर को दिल से कल्मा पढाया है दोस्तों!

मेरा रफीक रस्ता बताया है दोस्तो!!

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